हमारे प्राकृतिक संसाधन, प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण

 हमारे प्राकृतिक संसाधन, प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण

हमारे आस-पास उपस्थित हर वह वस्तु, जिसका प्रयोग हम अपनी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करते हैं, संसाधन कहलाती है। उदाहरण के लिए जब हमें प्यास लगती है तो हम पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं। पानी या जल एक संसाधन है जिसका उपयोग हम अपनी प्यास बुझाने के साथ-साथ नहाने, कपड़ा धोने, सिंचाई आदि कार्यों के लिए भी करते हैं। पेड़-पौधे, वनस्पतियाँ भी एक संसाधन हैं जो हमारी विभिन्न आवश्यकताओं जैसे- भोजन, आवास, कपड़ा आदि को पूरा करती हैं। इसी तरह भूमि हमें कृषि हेतु उपजाऊ मिट्टी प्रदान करती है, तथा तेल, कोयला और गैस, यातायात और उद्योगों में ईंधन के रूप में प्रयोग किए जाते हैं। जो वस्तुएं हमें प्रकृति से प्राप्त होती हैं तथा जिनमें हम किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं कर सकते हैं, प्राकृतिक संसाधन कहलाती हैं। प्रकृति के द्वारा यह जैसी उत्पन्न होती हैं, उनका हम उसी रूप में प्रयोग करते हैं जैसे-हवा, जल, सौर ऊर्जा, मिट्टी आदि। स्पष्ट है कि ऐसे संसाधन जिनको बनाने में मनुष्य का कोई योगदान नहीं होता है अर्थात् ये संसाधन हमें प्रकृति द्वारा निःशुल्क प्राप्त होते हैं, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं।
मनुष्य की प्रगति, विकास तथा अस्तित्व प्राकृतिक संसाधनों पर ही निर्भर है। प्राकृतिक पर्यावरण के अन्तर्गत उपलब्ध संसाधनों जैसे-हवा, मिट्टी, सौर ऊर्जा, पेड़-पौधे आदि का उपयोग करके हम अपनी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। हम अपने दैनिक जीवन में अनेक प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं जिनके बिना हमारा जीवित रहना संभव नहीं है, जैसे-हवा, जल, पेड़-पौधे आदि। इसके अलावा कुछ प्राकृतिक संसाधन ऐसे हैं जो हमारे जीवन को आसान व सुखमय बनाने में हमारी सहायता करते हैं। जैसे-खनिज पदार्थ, पेट्रोल, डीजल, कोयला आदि। प्राकृतिक संसाधन हमें प्रकृति द्वारा दिए गए उपहार हैं जो हमारे लिए बहुत ही आवश्यक हैं।

प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण



प्राकृतिक संसाधन
सूर्य- पृथ्वी में समस्त जीवन का आधार सूर्य ही है। सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। यह एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। सूर्य से हमें गर्मी मिलती है। सूर्य हमारे दैनिक जीवन में बहुत आवश्यक है इसकी उपयोगिता निम्नलिखित है -

•       जल चक्र बनाए रखने में।
•        वायुमण्डल में वायु प्रवाह बनाए रखने में।
•         जलवायु को नियंत्रित करने में।
•        पौधों को भोजन बनाने के लिए ऊर्जा प्रदान करने में।
•      घर में नमी, सीलन को दूर करने तथा कपड़े सुखाने में।
•      हमारा शरीर सूर्य के प्रकाश से विटामिन डी बनाता है जो हमारी हड्डियों को मजबूत रखने के लिए आवश्यक है।

वायु- आप जानते हैं कि पृथ्वी के चारों ओर वायु का घेरा है। इसे हम देख नहीं सकते हैं, केवल अनुभव कर सकते हैं। वायु हर समय हमारे चारों ओर रहती है। वायु हमारे लिए अत्यन्त आवश्यक है। भोजन और जल के बिना तो हम कुछ समय तक जीवित रह सकते हैं। परन्तु वायु के बिना हम जीवित नहीं रह सकते है। वायु हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

जल- जल ही जीवन है। हम जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। हमारे शरीर में लगभग 70 प्रतिशत भाग जल का होता है। जल शरीर के रक्त को तरल बनाता है जिससे शरीर में रक्त का प्रवाह सरलता से होता है। खाना पचाने एवं अनावश्यक पदार्थों को पसीना, मल-मूत्र आदि के रूप में शरीर से बाहर निकालने में पानी सहायक होता है। इसके अलावा दैनिक जीवन के विभिन्न कार्यों में भी पानी की आवश्यकता होती है।


भूमि- वायु और जल की तरह भूमि भी हमारे जीवन का आधार है। भूमि ही है जो हमें फल, अन्न, सब्जियाँ, औषधियाँ, इमारती लकड़ियाँ प्रदान करने वाले पौधे और वृक्षों को जीवन का आधार देती है। भूमि ही जल तथा खनिजों का भण्डार है। खेती एवं वनों के लिए भूमि का होना अत्यन्त आवश्यक है।

    वर्तमान समय में जनसंख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कृषि तथा उद्योग धन्धों का प्रभाव दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है जो हमारे प्राकृतिक संसाधनों को प्रभावित कर रहा है। यदि हम बिना सोचे समझे लगातार प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब हम इनसे वंचित हो जाएगें। अतः हमें प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझना होगा और उनके संतुलन तथा बचाव के उपाय करने होंगे।

    इस प्रकार हमने जाना कि मानव जीवन, पेड़-पौधे और जीव-जन्तुओं के विकास में प्राकृतिक संसाधन अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं लेकिन ये तभी हमारे लिए लाभकारी होंगे जब हम इनके संरक्षण के लिए निरंतर जागरूक रहेंगे तथा उचित उपाय करते रहेंगे।